UPSC,RPSC Senior teacher,REET,NET,CTETजैसी प्रतियोगी परीक्षाओ में जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में NCERT CLASS-07 के "भारत की भौगोलिक विविधता"अध्याय से सीधे प्रश्न पूछे जाते है इस अध्याय में हम भारत की विभिन्न भौगोलिक प्रदेशों जैसे महान पर्वतीय क्षेत्र - हिमालय , गंगा, सिंधु व ब्रह्मपुत्र का मैदान,मरुस्थलीय भू-भाग - थार मरुस्थल,दक्षिण प्रायद्वीपीय पठार, द्वीप समूह एवम् सुंदरवन डेल्टा,पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ आदि के बारे में इस अध्याय में जानेगे -
यह देश अपने भूगोल के कारण ही अन्य देशों से सर्वदा भिन्न प्रतीत होता है और यही इसके राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में विशिष्ट योगदान देता है" – अरविंद घोष
भारत को 5 प्रमुख भागों में विभाजित करते हैं-
1. महान पर्वतीय क्षेत्र - हिमालय
2. गंगा, सिंधु व ब्रह्मपुत्र का मैदान
3. मरुस्थलीय भू-भाग - थार मरुस्थल
4. दक्षिण प्रायद्वीपीय पठार
5. द्वीप समूह
1. हिमालय पर्वत श्रृंखला-
· स्थिति - उत्तर दिशा में प्राकृतिक प्राचीर के रूप में स्थित
· लंबाई -लगभग 2,500 किमी
· चौड़ाई -150 से 400 किमी
· ऊँचाई - कई चोटियाँ 8,000 मीटर से भी ऊँची, इसलिए सामूहिक रूप से "आठ हज़ारी" भी कहा जाता है
👉विस्तार-
एशिया के 6 देश – भारत,नेपाल,भूटान,चीन,पाकिस्तान,अफगानिस्तान।
👉सांस्कृतिक महत्व-
हिमालय अनेक संस्कृतियों और आस्थाओं का केंद्र है। इसे पवित्र माना जाता है। यहाँ अनेक मठ और मंदिरों का निर्माण हुआ है जिसके कारण यह तीर्थ स्थल आज भी संपूर्ण विश्व में संतों, महात्माओं व अन्य आध्यात्मिक साधकों को ध्यान, अर्चना और साधना के लिए आकर्षित करता है।
👉हिमालय का निर्माण-
भारत गोडवाना नामक एक बड़े भूभाग का हिस्सा था। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा की ओर धीरे-धीरे खिसकने लगी और यूरेशिया प्लेट से टकरा गई। इंडियन प्लेट के यूरेशिया प्लेट से टकराने से इसके बीच की भूमि वलित होकर ऊपर उठने लगी जिससे हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ। आज भी भारतीय प्लेट खिसक रही है जिससे प्रतिवर्ष हिमालय पर्वत 5 मिमी की दर से ऊँचा उठ रहा है और हज़ार साल में इसकी ऊँचाई लगभग 5 मीटर तक बढ़ जाती है । हिमालय पर्वत की जगह कभी “टेथिस सागर” था।
👉हिमालय नाम का अर्थ-
हिमालय शब्द संस्कृत के दो शब्दों हिम अर्थात बर्फ और आलय अर्थात निवास या घर से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है "बर्फ का घर"।
हिमालय के तीन प्रमुख वर्ग-
1. 👉हिमाद्रि / वृहत हिमालय-
· सबसे ऊँची और सर्वाधिक विकट श्रृंखला। माउंट एवरेस्ट(Nepal) और कंचनजंगा (सिक्किम) जैसी पर्वत शिखर स्थित हैं। यह क्षेत्र संपूर्ण वर्ष हिमाच्छादित रहता है
2. 👉हिमाचल / लघु हिमालय-
· वृहत हिमालय के दक्षिण में स्थित। इसकी जलवायु समशीतोष्णहै जो समृद्ध जैव-विविधता और मानव निवास के लिए अनुकूल है। नैनीताल(उत्तराखंड), मसूरी (उत्तराखंड), दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल), शिमला (हिमाचल प्रदेश) जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल इसी क्षेत्र में स्थित हैं
👉शिवालिक पहाड़ियाँ-
· सबसे निचली पर्वत श्रृंखला। इसमें घुमावदार पहाड़ियाँ और घने जंगल सम्मिलित हैं। यह गिरिपद वन्यजीवों से समृद्ध है और हिमालय और गंगा के मैदान के बीच एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में कार्य करता है
👉हिमालयी राज्य-
1.
जम्मू-कश्मीर,
2.
लद्दाख,
3.
हिमाचल प्रदेश,
4.
उत्तराखंड,
5.
सिक्किम,
6.
अरुणाचल प्रदेश,
7.
नागालैंड,
8.
मिजोरम,
9.
मणिपुर,
10.
मेघालय,
11.
असम,
12. त्रिपुरा
➤विशेष तथ्य-
👉काथ-कुनी / धज्जी-देवरी शैली -
· पश्चिमी हिमालय क्षेत्र, विशेषकर हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक गृह निर्माण पद्धति। इसमें स्थानीय पत्थर और लकड़ी के संयोजन का उपयोग होता है जो न केवल घरों को गर्म रखता है बल्कि हल्के भूकंप की स्थिति में भी सुरक्षित बनाता है ।
👉ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान (हिमाचल प्रदेश)-
· वनस्पतियों और जीवों की अत्यधिक जैव विविधता पाई जाती है इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है ।
👉बुरांश / रोडोडेंड्रन-
· हिमालय क्षेत्र में पाया जाने वाला पुष्प, जिससे एक विशेष प्रकार का शीतल पेय बनता है
2.भारत का शीत मरुस्थल - लद्दाख
· लद्दाख भारत का एकमात्र शीत मरुस्थल है और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
· सर्दियों में तापमान -30°C से नीचे चला जाता है ।
· यहाँ पैंगोंग त्सो जैसी झीलें पाई जाती हैं ।
· भूमि चंद्रमा की सतह जैसी दिखती है, इसलिए इसे "चंद्रभूमि" कहा जाता है ।
· हिम तेंदुआ, आइबेक्स और तिब्बती मृग जैसे अद्वितीय वन्य जीवों का घर है ।
· यहाँ प्राचीन बौद्ध मठ पाए जाते हैं। यहाँ के लोसर और हेमिस महोत्सव प्रसिद्ध हैं ।
3.गंगा-सिंधु-ब्रह्मपुत्र का मैदान-
· हिमालय के दक्षिण में स्थित विशाल मैदान है ।
· गंगा, सिंधु तथा ब्रह्मपुत्र और इसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी इस क्षेत्र को उपजाऊ तथा खनिज से समृद्ध बनाती है ।
· यहाँ पर प्रचुर मात्रा में कृषि संभव होती है ।
· नदियाँ जल विद्युत उत्पादन का भी स्रोत हैं ।
· भारत की विशाल जनसंख्या इस मैदानी क्षेत्र में रहती है ।
· समतल भूमि परिवहन तंत्र - रेल तथा सड़क के लिए सुविधाजनक है ।
👉विशेष तथ्य-
· भारत की अधिकांश नदियों के नाम देवियों के नाम पर रखे गए हैं जैसे गंगा, यमुना
· ब्रह्मपुत्र का अर्थ होता है "ब्रह्मा का पुत्र"
· हिमालय से निकलने वाली नदियों में जल की मात्रा गर्मियों में घटने की बजाय बढ़ती है क्योंकि गर्मियों में हिमालय की चोटियों पर जमी बर्फ पिघलने लगती है
· बाघ जो विलुप्ति के कगार पर था "प्रोजेक्ट टाइगर" से इसका पुनर्वास किया गया है। भारतीय घड़ियाल विलुप्ति के कगार पर है जिसे कानूनी रूप से संरक्षण प्राप्त है
· यह मैदान भारत का "अन्न भंडार" कहलाता है और देश की 40% से अधिक जनसंख्या का भरण-पोषण करता है।
4.विशाल भारतीय मरुस्थल / थार मरुस्थल-
·
भारतीय थार मरुस्थल भारत के पश्चिम में सुनहरी रेत का विशाल गर्म शुष्क मरुस्थल
·
भारतीय थार मरुस्थल राजस्थान,
गुजरात, पंजाब और हरियाणा राज्यों में फैला है
·
भारतीय थार मरुस्थल में दिन का तापमान अत्यधिक होता है, रातें ठंडी होती हैं
·
भारतीय थार मरुस्थल में रेत के विशाल टीले पाए जाते हैं जिनकी ऊँचाई 150 मीटर तक होती है
·
जल अभाव: महिलाएँ रोज लंबी दूरी तय करके पानी लाती हैं। बर्तन साफ करने के लिए बालू/रेत का प्रयोग करती हैं
·
राजस्थान में जल संरक्षण पारंपरिक विधि से टांका तथा कुंड बनाए जाते हैं
👉विशेष तथ्य-
· ऊँट: इसे रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है।
· थार मरुस्थल विश्व का सबसे घनी आबादी वाला मरुस्थल है।
· अरावली पर्वत श्रृंखला विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है लगभग ढाई अरब वर्ष पुरानी है।
· अरावली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी माउंट आबू (1,722 मीटर) ऊँची है ।
· अरावली पर्वत श्रृंखला मरुस्थल के पूर्व में विस्तार को रोकती है।
· अरावली पर्वत श्रृंखला में संगमरमर, ग्रेनाइट, जस्ता और तांबे जैसे खनिजों से भरपूर है ।
· जावर (राजस्थान)में स्थित प्राचीन खदान से प्राप्त प्रमाणों से पता चलता है कि जस्ता निष्कर्षण में आठवीं शताब्दी से ही कौशल भारत को हासिल है।
· अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है।
5. प्रायद्वीपीय पठार-
·
पठार:- वह स्थलरूप है जो अपने चारों ओर की भूमि से ऊँचा होता है और इसकी सतह प्रायः समतल होती है। इसके कुछ किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं।
भारत में तीन प्रमुख पठार हैं – 1. मध्य उच्च भूमि 2. दक्षिण का दक्कन का पठार 3.उत्तरी पूर्वी पठार
· 👉प्रायद्वीपीय पठार-
इसके तीन ओर से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर द्वारा जल से घिरा होने के कारण इसे “प्रायद्वीपीय पठार” कहा जाता है।
· प्रायद्वीपीय पठार दो पर्वत श्रृंखलाओं पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट से घिरा हुआ है।
· 👉 पश्चिमी घाट -
यह अधिक ऊँचे हैं, प्राचीर की भांति पश्चिमी तट के साथ फैले हुए हैं। यहाँ कई सुंदर झरने हैं जो मानसून के मौसम में इसकी खड़ी ढालों पर बहते हैं। यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। अनेक नदियाँ प्रवाहित होती हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता से परिपूर्ण है। पश्चिमी घाट के उत्तर को सह्याद्रि पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है।
· 👉 पूर्वी घाट-
यह अपेक्षाकृत छोटे-छोटे पर्वतों में विभाजित है।
· कृष्णा, गोदावरी, कावेरी आदि नदियाँ इस पठार में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में अपना जल विसर्जित करती हैं।ये नदियाँ कृषि कार्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
· नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं
· प्रायद्वीपीय पठार खनिजों, वनों और उपजाऊ भूमि से समृद्ध है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है
· विंध्याचल-सतपुड़ा पठारों में घने जंगल आदिवासी समुदायों के आवास स्थल हैं। यहाँ संथाल, गोंड, बैगा, भील, कोरकू आदि जनजातियाँ पाई जाती हैं। इन जनजातियों की एक विशिष्ट भाषा, परंपरा और जीवन शैली है जो प्रकृति से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है।
· झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात राज्यों में बड़े पैमाने पर जनजातियाँ पाई जाती हैं।
· भारतीय पठारों में सुंदर जलप्रपात बनते हैं जो न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।अपितु जल विद्युत उत्पादन व सिंचाई में भी सहायक हैं।
➤विशेष तथ्य-
· “धुआँधार जलप्रपात” नर्मदा नदी पर (मध्य प्रदेश) स्थित है।
· “जोग जलप्रपात” शरावती नदी पर (कर्नाटक )भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है।
· प्रायद्वीपीय पठार “खनिजों का भंडार ” है और भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
6. भारतीय द्वीप समूह-
·
हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी* में स्थित द्वीपों के समूह को भारतीय द्वीप समूह कहते हैं।
· भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं-1. लक्षद्वीप द्वीप समूह 2. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
👉लक्षद्वीप द्वीप समूह-
· केरल के मालाबार तट के पास अरब सागर में स्थित है ।
· मूँगे / कोरल से बने 36 द्वीपों का समूह है ।
· भारत का एक विस्तृत समुद्री जल क्षेत्र पर नियंत्रण है जिससे उसे मछली पकड़ने, संसाधनों की खोज और पर्यावरण संरक्षण का भी अवसर मिलता है।
👉अंडमान और निकोबार द्वीप समूह-
· 500 से अधिक छोटे-बड़े द्वीपों का समूह है
· इसे अंडमान द्वीप समूहऔर निकोबार द्वीप समूह में बांटा जा सकता है ।
· भारत की निगरानी चौकी की तरह है जो समुद्र पर निगरानी रखते हैं।
· विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं
· ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण: हमारे अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को यहाँ सबसे कठोर परिस्थितियों में सेल्युलर जेल (अंडमान-निकोबार द्वीप समूह ) नामक कारावास में रखा गया था
· बैरन द्वीप (अंडमान-निकोबार द्वीप समूह) भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है ।
👉विशेष तथ्य-
· ये द्वीप समूह भारत को विशाल “ अनन्य आर्थिक क्षेत्र” प्रदान करते हैं।
भारत की अद्वितीय तट रेखाएं-
·
भारत की तट रेखा - 7,516.6 किमी लंबी है
· ➤भारत के तटीय राज्य-
1.
गुजरात
2.
महाराष्ट्र
3.
गोवा
4.
कर्नाटक
5.
केरल
6.
तमिलनाडु
7.
आंध्र प्रदेश
8.
ओडिशा
9.
पश्चिम बंगाल
· भारत की सबसे लंबी तट रेखा गुजरात की है ।
· पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा दक्षिण में हिंद महासागर स्थित है।
· श्रीलंका , भारत से मन्नार की खाड़ी तथा पाक जलसंधि द्वारा अलग है।
👉पश्चिमी तट-
· पश्चिमी घाट और अरब सागर के मध्य स्थित है ।
· पश्चिमी तट गुजरात से लेकर केरल तक विस्तृत है।
· पश्चिमी तट पर नदियाँ ज्वारनदमुख / एस्चुरी का निर्माण करती हैं।
· ज्वारनदमुख:-जब नदियाँ अपने द्वारा साथ लाए गए अवसाद को समुद्र के अंदर डाल देती हैं तो उसे ज्वारनदमुख कहते हैं।
· नर्मदा और ताप्ती नदियाँ भ्रंश घाटी से बहती हुई ज्वारनदमुख का निर्माण करती हैं।
· यहाँ बहुत महत्वपूर्ण पत्तन और नगर पाए जाते हैं जो भारत की आर्थिक गतिविधियों के केंद्र हैं।
👉पूर्वी तट-
· पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के मध्य स्थित है ।
· पूर्वी तट गंगा के डेल्टा से कन्याकुमारी तक विस्तृत है ।
· इसमें विस्तृत मैदान और नदियों के डेल्टा हैं जिनमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ प्रमुख हैं।
· यहाँ चिल्का झील(ओडिशा) में, पुलिकट झील (आंध्र प्रदेश) में जैसी महत्वपूर्ण लैगून झीलें पाई जाती हैं।
· डेल्टा: - जब नदियाँ अपने अवसाद को किसी बड़े जलाशय जैसे महासागर, झील या अपने मुहाने पर जमा करती हैं तब बनने वाली भू-आकृति डेल्टा कहलाती है। गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी आदि उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं ।
➤पश्चिम बंगाल और सुंदरवन डेल्टा-
· गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों का डेल्टा “सुंदरवन डेल्टा” कहलाता है ।
· इसका आधा भाग भारत (पश्चिम बंगाल )में और आधा भाग बांग्लादेश में है ।
· यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है ।
· सुंदरवन डेल्टा “रॉयल बंगाल टाइगर” के लिए प्रसिद्ध है ।
➤पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ-
· मेघालय के पठार में गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ हैं ।
· चेरापूंजी और मासिनराम (मेघालय) खासी पहाड़ियों में स्थित, विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है।
· मावलिननॉंग गाँव (मेघालय) खासी पहाड़ियों में स्थित, एशिया के सबसे स्वच्छ गाँव के रूप में प्रसिद्ध। यह रमणीय गाँव अपने स्वच्छता, बांस के कूड़ेदान, पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली के लिए प्रसिद्ध है। यह गाँव अपनी “लिविंग रूट ब्रिज” यानी जीवित जड़ों से बने पुलों के लिए जाना जाता है जो कई वर्षों के दौरान पेड़ों की जड़ों को मिलाकर बनाए जाते हैं ।
